Culture

चुर

यह हो समुदाय की महिलाओं द्वारा खेला जाने वाला खेल है। चुर खेल को प्रचण्ड  गर्मी में बारिश की संभावना हेतु हवा की दिशा एवं गति देने के लिए खेला जाता है। कैसे खेला जाता है ? 1.इस खेल को 9-9 महिलाओं द्वारा पक्ष-विपक्ष के रुप में खेला जाता है। चुर खेल का मैदान 14 मीटर चौड़ा और 56 मीटर लम्बा होता है। जो 8 भागों में बाँट कर बीचो-बीच लम्बाई में एक लाईन खींची Read more…

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Tradition

आंदि / Wedding

हो समुदाय में ‘शादी-विवाह’ का अशुभ मुहूर्त दूल्हा का जन्म दिन या दिवस और दूल्हन का जन्म दिन या दिवस होता है। क्योंकि, इन दो दिन या दिवस को जन्म छूत माना जाता है। एक वर्ष यानि बारह माह या मास में दो माह या मास अशुभ माना जाता है। एक होता है, पौष मास और दूसरा भादो मास को अशुभ माना जाता है। पौष मास को शादी-विवाह रचाने पर धन-दौलत की हानि होती है। Read more…

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जोनोम / Birth

खुशहाल जीवन व्यतित करने वाले हो समुदाय के लोगों की पहचान उनके रिति रिवाज परंम्परा से ही हो जाती है। जिसप्रकार शादी ब्याह की परंम्परा होती है उसीप्रकार किसी शिशु के जन्म की भी परम्परा एवं रिति रिवाज होते हैं। एक नवजात शिशु के जन्म के उपरान्त किस तरह के काम करने चाहिए कैसे-कैसे काम नहीं करने चाहिए किस तरह के खान-पान से जन्म देने वाली माँ को परहेज करना चाहिए ताकि उसे किसी तरह Read more…

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जोमनमा

प्रकृति मं सृष्टि के नये रुप को पाने की अवस्था को जोमनामा अथवा नामा जोनोम भी कहते है। कहने को मतलब यह है कि फसलो की नई फसल तैयार होने की प्रक्रिया को एंव भागीदारी का पर्व है जोमनामा। आदिकाल से लोक कथा के रुप में प्रचलित कहानी इस प्रकार है। सुरमी एंव मदे को सबसे छोटा पुत्र लिटा के युवा अवस्था पर पहुचने एवं दुरमी के बच्चे के द्वारा नाजायज पुत्र कहकर अपमनित करना Read more…

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सेकोर

सेकोर का अर्थ प्रकृति की दिशा पर घुमना । यह खेल हो समुदाय में भिषण गर्मी के दिनो मे खेला जाता है । जब सूरज की गर्मी बहुत अधिक बढ़ जाती है बरिश का नमो-निसान नही रहता है ऐसे समय में इस खेल को हो समुदाय के पुरूष वर्ग खेलते हैं। यह एक तरह का बड़ा लट्टू है। जो कुसूम के लकड़ी से निर्मण किया जाता है। इस खेल को सात-सात खिलाड़ियों के द्वारा पक्ष Read more…

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गोनोए

हो समुदाय में बुढ़ापा आने पर मृत्यु होने को स्वाभाविक मृत्यु कहा जाता है। स्वाभाविक मृत्यु की लाश को अपने गोत्र के कब्रस्थान ( उकु षासन) में ही दफन (तोपा) करने का पवित्र रिवाज होता है। किसी अन्य गोत्र के कब्रस्थान में दफन करने का रिवाज नहीं है। क्योंकि अपना और अन्य गोत्र का दुपुब दिषुम मरं वोंगा अलग होते हैं.। उसकी आत्मा को पवित्र अदिड. में आत्मा पुकार कर गृह प्रवेश (रोवाँ केया अदेर) Read more…

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बह: पर्व

हो जन जातियों का प्रकृति के स्वभाव एंव गतिविधि के अनुरुप जाड़े के मौसम के जाते-जाते बसन्त के अगमन के साथ मनाया जाता है। यह पर्व साल के फूल को आधार मान कर प्रकृति को सम्मान देने का त्यौहार है. साल के वृक्षों में जब फूल अपने प्रारभिक अवस्था में रहता है,-यहा वह समय है जब साल के फूल की आराधना एंव उपासना करते है। इस सृष्टि मे साल का फूल सबसे निराला है। सृष्टि Read more…

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Culture

मागे पर्व

आदिवासी #हो समुदाय के नव वर्ष का पहला और सबसे बड़ा त्योहार है- मागे_पर्व। यह फसल के कटने व खेत खलिहान के कार्य खत्म होने के बाद माघ महीने के पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस पर्व के मनाने के पीछे अनेक कहानियां प्रचलित हैं। इनमें नई जगह गांव बसाने की एक कथा भी प्रचलित है। दरअसल, मागे शब्द दो शब्दों का योग है। मा का अर्थ ‘मां’ और गे का मतलब ‘तुम ही हो’ होता है। Read more…

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Words

हो’ समुदायों (हुदा्) के पहचान चिह्न

हो’ समुदायों (हुदा्) में घर के दरवाजे में इस प्रकार के पहचान चिह्न के अंकन किये जाते हैंः-     Source: लेखकः डा0 दास राम बारदा केद्रीय धर्म सचिव, हो समाज महासभा, हरिगुटू, चाईबासा

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