सेकोर का अर्थ प्रकृति की दिशा पर घुमना । यह खेल हो समुदाय में भिषण गर्मी के दिनो मे खेला जाता है । जब सूरज की गर्मी बहुत अधिक बढ़ जाती है बरिश का नमो-निसान नही रहता है ऐसे समय में इस खेल को हो समुदाय के पुरूष वर्ग खेलते हैं। यह एक तरह का बड़ा लट्टू है। जो कुसूम के लकड़ी से निर्मण किया जाता है। इस खेल को सात-सात खिलाड़ियों के द्वारा पक्ष और विपक्ष बन कर खेला जाता है।

कैसे खेला जाता है?

इस खेल को सात-सात खिलाड़ियों के द्वारा पक्ष और विपक्ष के रुप में खेला जाता है।
सेकोर खेल के मैदान Square 7*7 Meter का होता है।
एक पक्ष के द्वारा मैदान के बीच में सेकोर को इकट्टा रखा जाता है जिसे अड़वा कहते है।
दुसरे पक्ष के द्वारा दक्षिण-पश्चिम के दिशा बारी-बारी कर सेकोर को सेकोर के द्वारा मर कर निकालने का प्रयास किया जाता है।
अत्यधिक सेकोर निकालने वाले को विजेता घोषित किया जाता है।


खेल का प्रभाव :

सेकोर खेल में एक दुसरे सेकोर को निकालने के क्रम मे जो टकराहट और घुरनन होती है। इससे असमान विचरण करते हुए बदल भी आपस में टकराते हैं और बरिश की सभावना बढ़ जाती है। अक्सर ये देखा जाता है कि सेकोर खेल के बाद बरिश होना अश्चर्य की बात नही है। इसका फायदा कृषि को मिलता है।

Categories: Tradition

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